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*Science/विज्ञान*
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*पृष्ठ तनाव*
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*संसंजक बल (Cohesive Force):*
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*एक ही पदार्थ के अणुओं के मध्य लगने वाले आकर्षण बल को संसंजक बल कहते हैं।*
*ठोसों में संसंजक बल का मान अधिक होता है*, फलस्वरूप *उनके आकार निश्चित होते हैं।*
*गैसों में संसंजक बल का मान नगण्य* होता है।
2.*आसंजक बल (Adhesive Force):*
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*दो भिन्न पदार्थों के अणुओं के बीच लगने वाले आकर्षण बल को आसंजक बल कहते हैं।*
*आसंजक बल के कारण ही एक वस्तु दूसरे से चिपकती* है।
3.*पृष्ठ तनाव (Surface tension):*
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*द्रव के स्वतंत्र पृष्ठ में कम-से- कम क्षेत्रफल प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है, जिसके कारण उसका पृष्ठ सदैव तनाव की स्थिति में रहती है। इसे ही पृष्ठ तनाव कहते हैं। किसी द्रव का पृष्ठ तनाव वह बल है, जो द्रव के पृष्ठ पर खींची गयी काल्पनिक रेखा की इकाई लम्बाई पर रेखा के लम्बवत् कार्य करता है। यदि रेखा की लम्बाई (l) पर F बल कार्य करता है, तो-*
*पृष्ठ तनाव, T=F T =*
4.*पृष्ठ तनाव का SI मात्रक न्यूटन मीटर होता है।*
5.*द्रव के पृष्ठ के क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि करने के लिए किया गया कार्य द्रव के पृष्ठ तनाव के बराबर होता है। इसके अनुसार पृष्ठ तनाव का मात्रक जूल/मीटर2 होगा।*
6.*द्रव का ताप बढ़ाने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है और क्रांतिक ताप (critical temp) पर यह शून्य हो जाता है।*
*नोटः घुलनशील नमक मिलाने पर जल का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।*
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*Science/विज्ञान*
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*ध्वनि तरंग*
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1.*ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें होती हैं।*
2. *ध्वनि तरंगों का आवृत्ति परिसर :*
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1. *अवश्रव्य तरंगें (Infrasonic Waves): (20 Hz से नीचे की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों) को 'अवश्रव्य तरंगें' कहते हैं। इसे हमारा कान सुन नहीं सकता है। इस प्रकार की तरंगों को बहुत बड़े आकार के स्रोतों से उत्पन्न किया जा सकता है।*
2. *श्रव्य तरंगें (Audible Waves): (20Hz से 20,000 Hz) के बीच की आवृत्ति वाली तरंगों को 'श्रव्य तरंग' कहते हैं। इन तरंगों को हमारा कान सुन सकता है।*
3. *पराश्रव्य तरंगें (Ultrasonic Wave): (20,000 Hz से ऊपर की आवृत्ति वाली तरंगों) को पराश्रव्य तरंगें कहा जाता है। मनुष्य के कान इसे नहीं सुन सकता है। परन्तु कुछ जानवर जैसे- कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ आदि, इसे सुन सकते हैं। इन तरंगों को (गाल्टन की सीटी के द्वारा तथा दाब विद्युत् प्रभाव की विधि द्वारा क्वार्ट्ज के क्रिस्टल के कम्पनों से उत्पन्न करते) हैं। इन तरंगों की आवृत्ति बहुत ऊँची होने के कारण इसमें बहुत अधिक ऊर्जा होती है। साथ ही इनका तरंगदैर्ध्य छोटी होने के कारण इन्हें एक पतले किरण-पुंज के रूप में बहुत दूर तक भेजा जा सकता है।*
*पराश्रव्य तरंगों के उपयोग:*
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*1. संकेत भेजने में*
*2. समुद्र की गहराई का पता लगाने में*
*3. कीमती कपड़ों, वायुयान तथा घड़ियों के पुर्जों को साफ करने में*
*4. कल-कारखानों की चिमनियों से कालिख हटाने में*
*5. दूध के अन्दर के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में*
*6. गठिया रोग के उपचार एवं मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने में*
*7. भ्रूण की जाँच करने में*
*8. गुर्दा में बनने वाली पथरी की जाँच करने में तथा उसे तोड़ने में।*
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*Science/विज्ञान*
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*उष्मीय प्रसार*
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1. *जल का असामान्य प्रसारः प्रायः सभी द्रव गरम किये जाने पर आयतन में बढ़ते हैं, परन्तु जल 0°C से 4°C तक गरम करने पर आयतन में घटता* है तथा *4°C के बाद गरम करने पर आयतन में बढ़ना शुरू कर देता है।*
2. *इसका अर्थ यह है कि 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है।*
*नोटः ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को सूखी बर्फ (Dry ice)* कहा जाता है क्योंकि *यह समान बर्फ की तरह द्रव में परिवर्तित नहीं होती है, बल्कि ठोस से सीधे गैस में परिवर्तित हो जाती है।*
3. *ऊष्मा का संचरण :*
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*ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान जाने को ऊष्मा का संचरण कहते हैं।*
*इसकी तीन विधियाँ हैं-
*1. चालन*
*2. संवहन* और
*3. विकिरण* ।
*A चालन (Conduction):*
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*चालन के द्वारा ऊष्मा पदार्थ में एक स्थान से दूसरे स्थान तक, पदार्थ के कणों को अपने स्थान का परिवर्तन किये बिना पहुँचती है।*
4. *ठोस में ऊष्मा का संचरण चालन विधि द्वारा ही होता है।*
5.*संवहन (Convection)*
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*इस विधि में ऊष्मा का संचरण पदार्थ के कणों के स्थानान्तरण के द्वारा होता है। इस प्रकार पदार्थ के कणों के स्थानान्तरण से धाराएँ बहती हैं, जिन्हें संवहन धाराएँ कहते हैं।*
6.*संवहन विधि में ऊष्मा की हानि सबसे तेज गति से होती है।*
7. *गैसों एवं द्रवों में ऊष्मा का संचरण संवहन द्वारा ही होता है।*
8.*रेफ्रिजरेटर में प्रशीत्तन पेटिका (Freezing chest) ऊपर में होती है ताकि रेफ्रिजरेटर का अन्य भाग संवहन के द्वारा ठंढी हो सके।*
9. *यदि रेफ्रिजरेटर के दरवाजे कुछ घंटो के लिए खुले छोड़ दे तो कमरे का तापमान बढ़ जाता है।*
9.*वायुमंडल संवहन विधि के द्वारा ही गरम* होता है।
10.*विकिरण (Radiation):*
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*विकिरण विधि में ऊष्मा, गरम वस्तु से ठण्डी वस्तु की ओर बिना किसी माध्यम की सहायता के तथा विना माध्यम को गरम किये प्रकाश की चाल से सीधी रेखा में संचरित होती है।*
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*Science/विज्ञान*
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*चुम्बकत्व*
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1. *प्राकृतिक चुम्बक लोहे का ऑक्साइड (Fe3O4) है।*
2. *इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता है।*
3. *कृत्रिम विधियों द्वारा बनाए गये चुम्बक को कृत्रिम चुम्बक कहते हैं; यह लोहा, इस्पात कोबाल्ट आदि से बनाया जा सकता है।*
4. *यह विभिन्न आकृति की होती है, जैसे-छड़ चुम्बक, घोड़ानाल चुम्बक, चुम्बकीय सूई आदि ।*
5. *चुम्बक लोहे को अपनी ओर आकर्षित करता है, इस गुण को चुम्बकत्व कहते हैं।*
6. *चुम्बक के सिरों के समीप चुम्बकत्व सबसे अधिक होता है।*
7. *वे क्षेत्र चुम्बक के ध्रुव (pole) कहलाते हैं।*
8. *चुम्बक के ठीक मध्य में चुम्बकत्व नहीं होता।*
9. चुम्बक को क्षैतिज तल में स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर *उसका एक ध्रुव सदैव उत्तर की ओर* तथा *दूसरा ध्रुव सदैव दक्षिण की ओर ठहरता* है। उत्तर की ओर ठहरने वाले ध्रुव को उत्तरी ध्रुव तया दक्षिण की ओर ठहरने वाले ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव कहते हैं।
10. *चुम्बक के दो ध्रुवों को मिलाने वाली रेखा को चुम्बकीय अक्ष कहते* है।
11. *समान ध्रुव में प्रतिकर्षण* एवं *असमान ध्रुव में आकर्षण होता है।*
*नोट: यदि किसी चुम्बक का तीसरा ध्रुव हो, तो तीसरा ध्रुव परिणामी ध्रुव कहलाता है।*
12. *चुम्बक चुम्बकीय पदार्थों में प्रेरण (Induction) द्वारा चुम्बकत्व उत्पन्न कर देता है।*
13. .*चुम्बकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक Field) :*
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चुम्बक के चारों ओर *वह क्षेत्र, जिसमें चुम्बक के प्रभाव का अनुभव किया जा सकता है, 'चुम्बकीय क्षेत्र' कहलाता है।*
14.*चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता:*
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चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् एकांक लम्बाई का ऐसा चालक तार रखा जाए जिसमें एकांक प्रबलता की धारा प्रवाहित हो रही हो तो चालक पर लगने वाला बल ही चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता की माप होगी। *चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता एक सदिश राशि है।* इसका *मात्रक न्यूटन ऐम्पियर-मी. अथवा वेबर/मी2 या टेसला (T) होता है।*
15.*चुम्बकीय बल रेखाएँ (Magnetic Lines of Force):*
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चुम्बकीय क्षेत्र में बल-रेखाएँ वे काल्पनिक रेखाएँ हैं, जो उस स्थान में चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को अविरत प्रदर्शन करती हैं। *चुम्बकीय बल-रेखा के किसी भी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श-रेखा उस बिदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है।*
*नोट : चुम्बकीय सुई उत्तर की तरफ संकेत करती है। मुक्त रूप से लटकी हुई चुम्बकीय सुई का अक्ष भौगोलिक अक्ष के साथ 18° का कोण बनाती है।*
16.*चुम्बकीय बल-रेखाओं के गुण :*
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1.*चुम्बकीय बल-रेखाएँ सदैव चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं, तथा वक्र बनाती हुई दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर जाती हैं और चुम्बक के अन्दर से होती हुई पुनः उत्तरी ध्रुव पर वापस आती हैं।*
2. *दो बल-रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं।*
3. *चुम्बकीय क्षेत्र जहाँ प्रबल होता है वहाँ बल-रेखाएँ पास-पास होती हैं।*
4. *एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की बल-रेखाएँ परस्पर समान्तर एवं बराबर-बराबर दूरियों पर होती हैं।*
17.*चुम्बकीय पदार्थ (Magnetic Substances):*
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1. *प्रति चुम्बकीय पदार्थ (Dia-Magnetic Substances):*
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*प्रति चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं, जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में चुम्बकित हो जाते हैं।*
*जस्ता, बिस्मथ, ताँबा, चाँदी, सोना, हीरा, नमक, जल आदि प्रति चुम्बकीय पदार्थों के उदाहरण हैं।*
2. *अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Substances):*
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*अनुचुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं, जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की दिशा में थोड़ी सी (एक से कम) चुम्बकीय हो जाते हैं। प्लैटिनम, क्रोमियम, सोडियम, एल्युमिनियम, ऑक्सीजन आदि इसके उदाहरण हैं।*
3. *लौह चुम्बकीय (Ferromagnetic Substances) :*
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*लौह चुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ हैं, जो चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकित हो जाते हैं।*
*लोहा, निकेल, कोबाल्ट, इस्पात इसके उदाहरण हैं।*
18.*डोमेन (Domains) :*
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*लौह चुम्बकीय पदार्थ में प्रत्येक परमाणु ही एक चुम्बक होता है और उनमें असंख्य परमाणुओं के समूह होते हैं जिन्हें डोमेन कहते हैं।*
*एक डोमेन में 1018 से 1021 तक परमाणु होते हैं, लौह चुम्बकीय पदार्थों का तीव्र चुम्बकत्व इन डोमेनों के कारण ही होता है।*
19. *क्यूरी ताप (Curie Temperature):*
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*क्यूरी ताप वह ताप है, जिसके ऊपर पदार्थ अनु चुम्बकीय व जिसके नीचे पदार्थ लौह चुम्बकीय होता है।*
*लोहा एवं निकेल के लिए क्यूरी ताप के मान क्रमशः 770°C तथा 358°C होता है।*
20.*अस्थायी चुम्बक बनाने के लिए नर्म लोहे का प्रयोग किया जाता है।*
21. *स्थायी चुम्बक बनाने के लिए इस्पात का प्रयोग किया जाता है।*
*> भू-चुम्बकत्व (Terrestrial Magnetism):*
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*किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र को तीन तत्त्वों द्वारा व्यक्त किया जाता है दिकपात् कोण (angle of declination), नमन कोण (angle of dip) तथा चुम्बकीय क्षेत्र की क्षैतिज घटक (horizontal component of earth's magentic field)*
1. *दिक्पाल कोणः*
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*किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के कोण को दिक्पाल कोण कहते हैं।*
2. *नमन कोण :*
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*किसी स्थान पर पृथ्वी का सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज तल के साथ जितना कोण बनता है, उसे उस स्थान का नमन कोण कहते हैं। पृथ्वी के *ध्रुव पर नमन कोण का मान 90° तथा विषुवत् रेखा पर 0° होता है।*
3. *चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक पृथ्वी के सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक (H) अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग होता है। परन्तु इसका मान लगभग 0.4 गाँस या 0.4 × 104 टेसला होता है।*
नोट : पृथ्वी एक बहुत बड़ा चुम्बक है, *इसका चुम्बकीय क्षेत्र दक्षिण से उत्तर दिशा में विस्तृत होता है।*
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*Science/विज्ञान*
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*नाभिकीय विखंडन तथा संलयन*
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1.*नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)*
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1. *वह नाभिकीय प्रतिक्रिया जिसमें कोई एक भारी नाभिक दो भागों में टूटता है, नाभिकीय विखण्डन कहलाता है।*
2. *विखण्डन के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं।*
3. *सबसे पहले नाभिकीय विखंडन (fission) अमेरिकी वैज्ञानिक स्ट्रासमैन एवं हॉन के द्वारा दिखाया गया।*
4. *इन्होंने जब यूरेनियम-235 पर न्यूट्रॉनों की बमबारी की तो पाया कि यूरेनियम के नाभिक दो खण्डों में विभाजित हो जाते हैं।*
*श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction)*
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5. *जब यूरेनियम पर न्यूट्रॉनों की बमबारी की जाती है, तो एक यूरेनियम नाभिक के विखंडन पर बहुत अधिक ऊर्जा व तीन नए न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।*
6. *ये उत्सर्जित न्यूट्रॉन यूरेनियम के अन्य नाभिकों को विखण्डित करते हैं। इस प्रकार यूरेनियम नाभिकों के विखंडन की एक श्रृंखला बन जाती है। इसे ही श्रृंखला अभिक्रिया कहते हैं।*
7. *श्रृंखला अभिक्रिया दो प्रकार की होती है।*
8. *1.अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया* 2. *नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया*
1. *अनियंत्रित मृखला अभिक्रिया (Uncontrolled chain reaction) इस अभिक्रिया में तीन नए निकलने वाले न्यूट्रॉन पर नियत्रंण नहीं होता, जिसके कारण नाभिकों के विखंडन की दर, 1, 3, 9, 27... के अनुसार होती है, फलस्वरूप ऊर्जा अत्यन्त तीव्र गति से उत्पन्न होती है तथा बहुत कम समय में बहुत अधिक विनाश कर सकती है।*
2. *इस अभिक्रिया में प्रचण्ड विस्फोट होता है।*
3. *_परमाणु बम_ में यही अभिक्रिया होती है।*
9. *समृद्ध यूरेनियम:*
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*जिस यूरेनियम में यूरेनियम-235 की मात्रा अधिक होती है उसे समृद्ध यूरेनियम कहते हैं।*
10.*परमाणु बम बनाने के लिए समृद्ध यूरेनियम का ही उपयोग होता है।*
11.*परमाणु बम (Atom Bomb)*
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*1.परमाणु बम का विकास जे. रॉबर्ट ओपेनहीयर के निर्देशन में अमेरिका के द मैनहट्टन प्रोजेक्ट के तहत द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ।*
2.*परमाणु बम को बनाने के लिए यूरेनियम (235) तथा प्लूटोनियम (Pu29) का प्रयोग किया जाता है।*
3.*यह नाभिकीय विखंडन के सिद्धान्त पर आधारित है।*
4. *परमाणु बम का सर्वप्रथम प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा जापान के विरुद्ध किया गया था।*
5. *प्रथम परमाणु बम यूरेनियम 235 से बना लिटिल बॉय (little boy) 6 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर* तथा *दूसरा परमाणु बम प्लूटोनियम 239 से बना फैटमैन (Fatman) 9 अगस्त, 1945 को जापान के नागासाकी शहर पर गिराया गया*
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