बाल विकास
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*D.el.ed/ B.ed*
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1.*बालक अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर अपनी नवीन सोच का विकास कर सकता है। इस प्रकार की सोच का विकास स्थायी ज्ञान में वृद्धि करता है। इस प्रकार शिक्षक अगर पाठ्य-पुस्तक के साथ अन्य संदर्भ जोड़ता है, तो अनुभव और गहन होता है।*
2.*वातावरण का अर्थ है-पर्यावरण अर्थात् चारों ओर घेरने वाला सामाजिक वातावरण । इससे विद्यालय में समाज के लोगों का आना-जाना बना रहता है, जिससे बालकों का सामाजिक अन्तर्सबन्ध स्थापित होता है, जो उसके समाजीकरण में सहायक सिद्ध होता है।*
3.*अनिवार्य रूप से किसी नई वस्तु का सृजन करना ही सृजनात्मकता है, इस प्रकार के बालकों का दृष्टिकोण सामान्य व्यक्तियों से अलग होता है और उनमें मौलिकता के दर्शन होते हैं।*
4. *बहुमानसिक योग्यता का सिद्धांत कैली महोदय ने दिया है, इनके अनुसार बालक कई प्रकार के कौशलों में निपुण होते हैं, इनमें सामाजिक योग्यता, संगीतात्मक योग्यता, यांत्रिक योग्यता आदि होती हैं।*
5.*भाषा विकास एक प्रक्रिया है। यह बालक के रोने-चिल्लाने से शुरू होकर भाषा की बेहतर समझ तक होती है। यह भाषा विकास की पूर्णावस्था है।*
6.*शारीरिक विकास के अंतर्गत व्यक्ति के बाह्य एवं आंतरिक अवयवों का विकास शामिल है।*
*अतः आयु वृद्धि के साथ-साथ व्यक्ति में होने वाले परिवर्तन को जानना चाहते हैं, तो शारीरिक विकास का अध्ययन करना पड़ेगा ।*
7. *नैतिक विकास में बालक को दो अवस्थाओं से गुजरना होता है-नैतिक वास्तविकता एवं नैतिक सापेक्षता, जिसे जीन पियाज ने दिया है।*
8. *यह ऐसी शिक्षा पद्धति है, जिसमें बालक को लिखना सिखाने में आँखें, कान एवं हाथ तीनों के समुचित प्रयोग पर बल दिया जाता है। इसमें भाषा शिक्षा पर जोर है और इस पद्धति का उद्देश्य मातृभाषा में शिक्षा का है।*
9. *समाजीकरण बालक को एक सामाजिक प्राणी बनाता है। इससे व्यक्ति में सहयोग की भावना, समाज के प्रति संवेदनशीलता का विकास होता है और समाज से अन्तःक्रिया के कारण बालक में परस्पर सहयोग की भावना जागृत होती है।*
10. *आज की शिक्षा पद्धति बाल-केन्द्रित है।*
*इसमें प्रत्येक बालक की ओर अलग से ध्यान दिया जाता है। इससे समाज के हर तबके का विकास संभव होगा और तब जाकर शिक्षा सार्थक होगी।*
11. *परीक्षा का अर्थ है-बालक के ज्ञान को परखना ।*
*इसके लिए आवश्यक है कि परीक्षा की बेहतर विधि हो ताकि सही मूल्यांकन संभव हो । इसके लिए परीक्षा योजना में व्यावहारिकता (आवश्यकतानुरूप) हो, विश्वसनीय हो एवं प्रणाली वैध हो ।*
12. *प्रेरणा अर्थात् कार्य के प्रति उत्साह और यह तब आती है, जब विद्यार्थी में विषय के प्रति रुचि हो और दूसरा व्यक्ति तब प्रेरित होता ह जब उसमें प्रोत्साहन एवं अकांक्षा हो अर्थात् रुचि प्रेरणा से आती है।*
13. *भाषण मौखिक अभिव्यक्ति का माध्यम है।*
*भाषण के दौरान कुछ पूर्वनिर्धारित योजनाएँ बनानी होती हैं ताकि इसे प्रस्तुत करते समय त्रुटि की संभावना कम हो।*
*सबसे पहले इसकी तैयारी हो, समाजीकरण हो, तुलना हो और आखिरी में इसे प्रस्तुत किया जाए ।*
14. *समाज के कुछ अपने मूल्य होते हैं, जिन्हें समाजीकरण के माध्यम से बालक को सिखाया जाता है।*
*समाजीकरण की प्रक्रिया में विद्यालय एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है और अगर शिक्षक को समाज के मूल्यों का पता है और वह जागरूक है, तो वह मूल्यों को बालक तक पहुँचाता है एवं समाज की धरोहर को जीवित रखता है।*
15. *कोहलबर्ग ने चरित्र निर्माण या नैतिक विकास की तीन अवस्था बताई, जिसमें तीसरी अवस्था आत्म अंगीकृत नैतिक मूल्य स्तर है, जिसमें यह बताया है कि नैतिक विकास में अच्छे आपसी व्यवहार महत्वपूर्ण हैं।*
16.*परिवार का वातावरण, कक्षा का वातावरण तथा पास-पड़ोस का वातावरण किसी भी बालक के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का कारण हो सकते हैं।*
17. *सृजनात्मकता मौलिक परिणामों को व्यक्त करने की एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसमें खोजपूर्ण प्रवृत्ति, अच्छी अन्तर्दृष्टि तथा क्रियाशीलता का गुण पाया जाता है।*
18. *किशोरावस्था बाल विकास की दृष्टि से सर्वाधिक कठिन एवं समस्या वाली अवस्था है।*
*बालक तथा बालिकाओं में इस अवस्था में अति तीव्र परिवर्तन होते हैं। स्टेनले हॉल के अनुसार, "किशोरावस्था जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन, कठिन संघर्ष और तूफानी दौर का समय है।"*
19. *पुस्तक को आँखों के नजदीक लाकर पढ़ना, शिक्षक से अक्षर स्पष्ट न दिखने की शिकायत करना तथा श्यामपट्ट पर लिखे कार्य को नोट बुक में न उतार पाना आंशिक दृष्टिदोष युक्त बालक के व्यवहार की प्रमुख विशेषताएँ हैं।*
20. *थॉर्नडाइक द्वारा प्रतिपादित सीखने के 'प्रयास व त्रुटि' का नियम लक्ष्य को प्राप्त करने में सर्वाधिक महत्व देता है।*
21. *कम गति से सीखने वाले बच्चों में मुख्यतः किसी-न-किसी प्रकार की अधिगम संबंधी अक्षमता होती है, जो ज्ञानार्जन व शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित करती है। ऐसे बच्चों में सीखने, सुनने, बोलने, लिखने, तर्कशक्ति या गणितीय कौशल आदि से संबंधित समस्याओं का होना उनकी प्रमुख विशेषता है।*
22. *मानसिक पिछड़ेपन (मन्द-बुद्धि) का प्रमुख कारण वंशानुक्रम ही है। मन्द-बुद्धि अक्षमता को ही जन्मजात समझा जाता है, क्योंकि उन्हें इसका मुख्य भाग उनके माता-पिता के मानसिक पिछड़ेपन (मन्द-बुद्धिता) से मिलता है।*
23. *'रचनावाद' बच्चों को अपना ज्ञान स्वयं निर्माण करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे उनमें प्रतिभा का विकास होता है।*
24. *सहयोग करने वालों में 'हम की भावना' का विकास और उनके साथ काम करने की क्षमता का विकास तथा संकल्प समाजीकरण है, जिसकी जाँच हेतु समाजमिति तकनीक का प्रयोग किया जाता है।*
25. *शिक्षक हमेशा बच्चों की नजर में एक आदर्श होते हैं। अतः एक प्रभावी शिक्षक के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि उसका उच्च सामाजिक-आर्थिक स्तर हो ।*
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